news-details
बड़ी खबर

हरियाणा में उच्च शिक्षा के सामने बड़ा संकट! कॉलेजों में हजारों सीटें खाली, कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भी विद्यार्थियों की भारी कमी

Raman Deep Kharyana :-

हरियाणा में उच्च शिक्षा के सामने बड़ा संकट! कॉलेजों में हजारों सीटें खाली, कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भी विद्यार्थियों की भारी कमी

उच्च शिक्षा विभाग की 'कॉलेज वाइज फिल्ड सीट रिपोर्ट' ने खोली जमीनी हकीकत, प्रवेश प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल


 हरियाणा के सरकारी, सहायता प्राप्त (Aided) और स्ववित्तपोषित (Self Finance) डिग्री कॉलेजों में प्रवेश की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी "College Wise Filled Seat Report" से स्पष्ट होता है कि प्रदेश के अधिकांश कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें अभी भी रिक्त हैं। यह केवल कुछ संस्थानों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि लगभग पूरे राज्य में प्रवेश की धीमी गति का संकेत देती है।


रिपोर्ट के अनुसार अंबाला, कैथल, गुरुग्राम, हिसार, करनाल, रोहतक, सिरसा, पानीपत, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, पलवल, सोनीपत, यमुनानगर सहित लगभग सभी जिलों के कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह किसी एक जिले या एक प्रकार के कॉलेज की समस्या नहीं, बल्कि पूरे उच्च शिक्षा तंत्र के सामने उभरती हुई चुनौती है।


अंबाला जिले में सनातन धर्म कॉलेज, अंबाला छावनी की 1540 सीटों में केवल 232 प्रवेश हुए हैं तथा 1308 सीटें रिक्त हैं। डीएवी कॉलेज, अंबाला शहर में 920 सीटों में केवल 92 प्रवेश दर्ज हुए हैं। सरकारी कॉलेज, अंबाला छावनी में 1420 सीटों में 519 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दशकों से स्थापित संस्थान भी अपेक्षित संख्या में विद्यार्थियों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।


कैथल जिले में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। आर.के.एस.डी. (पीजी) कॉलेज, कैथल में 2522 सीटों के मुकाबले केवल 490 प्रवेश हुए हैं और 2032 सीटें खाली हैं। जाट कॉलेज, कैथल में 890 सीटों में केवल 93 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। सरकारी कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में सीटें रिक्त हैं।


गुरुग्राम जैसे औद्योगिक और महानगरीय जिले में भी तस्वीर उत्साहजनक नहीं है। डी.जी.सी. गुरुग्राम में 3120 सीटों में केवल 702 प्रवेश हुए हैं। वहीं कुछ स्ववित्तपोषित संस्थानों में शून्य या अत्यंत कम प्रवेश दर्ज होना विशेष चिंता का विषय है।


रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि समस्या केवल निजी कॉलेजों तक सीमित नहीं है। सरकारी और एडेड कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में सीटें रिक्त हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि विद्यार्थियों की पसंद, करियर की प्राथमिकताएं और उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हालांकि इन कारणों का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है; यह उपलब्ध आंकड़ों से निकाला गया विश्लेषण है।


विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं—रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की बढ़ती मांग, निजी विश्वविद्यालयों का विस्तार, कौशल आधारित शिक्षा की ओर झुकाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा कुछ क्षेत्रों से विद्यार्थियों का अन्य राज्यों की ओर रुख। इन संभावित कारणों की पुष्टि यह रिपोर्ट नहीं करती, इसलिए इन पर अलग से अध्ययन की आवश्यकता होगी।


यदि हजारों सीटें लगातार खाली रहती हैं तो इसका सीधा प्रभाव कॉलेजों की शैक्षणिक गतिविधियों, संसाधनों के उपयोग, वित्तीय योजना, नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत और दीर्घकालीन संस्थागत विकास पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और विश्वविद्यालयों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे कॉलेजवार तथा विषयवार समीक्षा करें और यह समझें कि किन पाठ्यक्रमों की मांग घट रही है तथा किन क्षेत्रों में नए रोजगारपरक कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए।


शिक्षाविदों का मानना है कि अब केवल प्रवेश प्रक्रिया को लंबा करने या अतिरिक्त काउंसलिंग कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि पाठ्यक्रमों को उद्योग, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए। साथ ही कॉलेजों की गुणवत्ता, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और शोध गतिविधियों को भी मजबूत किया जाए, ताकि विद्यार्थी पारंपरिक डिग्री कॉलेजों की ओर पुनः आकर्षित हों।


उच्च शिक्षा विभाग की यह रिपोर्ट प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यदि आगामी प्रवेश चरणों के बाद भी यही स्थिति बनी रहती है तो उच्च शिक्षा नीति, सीट निर्धारण, पाठ्यक्रम संरचना और संस्थागत योजना की व्यापक समीक्षा करना समय की आवश्यकता होगी। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि हरियाणा की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां केवल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप संपूर्ण व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

हरियाणा में उच्च शिक्षा के सामने बड़ा संकट! कॉलेजों में हजारों सीटें खाली, कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भी विद्यार्थियों की भारी कमी

You can share this post!

author

Kharyana

By Admin

For advertisment kindly write us marketing@kharyana.com
Or call us +91-9992-788-081, +91-8053-307-000

0 Comments

Leave Comments