नामांकन CBI फर्जीवाड़ा मामला...सरकारी स्कूलों में फर्जी नामांकन मामले में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की विशेष अदालत द्वारा रिपोर्ट स्वीकार किया जाना अभी बाकि है
सीबीआई, चंडीगढ़ ने मंगलवार को राज्य के सरकारी स्कूलों में चार लाख फर्जी नामांकन से संबंधित एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है.। सीबीआई को किसी भी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने के लिए कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, सीबीआई की विशेष अदालत (हरियाणा) ने अभी तक इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है।
कथित फर्जी नामांकन का मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अतिथि शिक्षकों (guest teachers) से जुड़ी कार्यवाही के दौरान सामने आया था। मार्च 2016 में आंकड़ों के सत्यापन के बाद यह पाया गया कि विभिन्न कक्षाओं में नामांकित 22 लाख छात्रों में से केवल 18 लाख ही वास्तविक थे।
मुख्य बिंदु:
योजनाओं का दुरुपयोग: यह संकेत मिला था कि वंचित या कम आय वाले समूहों के छात्रों के लिए उपस्थिति बढ़ाने हेतु दी जाने वाली सुविधाओं (जैसे मिड-डे मील, वर्दी, स्कूल बैग और किताबें) का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा था।
जांच का इतिहास: जांच सतर्कता ब्यूरो (Vigilance Bureau) को सौंपी गई थी, जिसने 2018 में सात FIR दर्ज कीं।
अकेले करनाल, पानीपत और जींद जिलों में 50,687 मामले स्कूल छोड़ने (dropouts) या अनुपस्थिति के पाए गए।
सीबीआई की भूमिका: जांच में देरी के कारण, अदालत ने 2 नवंबर, 2019 को मामला सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। सीबीआई ने जुलाई 2024 में मामले दर्ज कर जांच शुरू की थी।
आंकड़ों का विश्लेषण:
डेटा 12,924 स्कूलों से एकत्र किया गया था। जांच में पाया गया कि:
532 स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 40% से अधिक थी।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में नूंह (86 स्कूल), महेंद्रगढ़ (69), और गुरुग्राम (35) शामिल थे।
सीबीआई के इंस्पेक्टर रणबीर ने अदालत को बताया कि क्लोजर रिपोर्ट के साथ साक्ष्य के रूप में लगभग 35,000 पन्नों के दस्तावेज हैं, जिन्हें अदालत के निर्देशानुसार पेश किया जाएगा।
CBI की बड़ी कार्रवाई: सरकारी स्कूल नामांकन फर्जीवाड़ा केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल
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